शेयर बाजार में लोअर सर्किट और अपर सर्किट क्या होता है
दोस्तो आज हम इस लेख में अपर सर्किट और लोअर सर्किट के बारे में जानेगे, आमतौर पर शेयर बाजार में सर्किट का प्रयोग किसी भी शेयर/ किसी इंडेक्स की कीमत में होने वाले उतार चड़ाव को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है,
Contents
लोअर सर्किट क्या है
लोअर सर्किट का इस्तेमाल कब होता है
अपर सर्किट क्या है
अपर सर्किट का इस्तेमाल कब होता है
भारतीय शेयर बाजार में कब से हुआ सर्किट का प्रावधान
कितनी देर के लिए रुकता है कारोबार
·
10 फीसदी का सर्किट नियम
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15 फीसदी का सर्किट नियम
·
20 फीसदी का सर्किट नियम
सर्किट का इस्तेमाल क्यों किया जाता है
लोअर सर्किट क्या है
जब कभी अचानक एक ही दिन में बाजार किसी कारन से टूट जाता है और कोई भी शेयर कॉफी नीचे आने लगता है, उस समय शेयर में आई बड़ी गिरावट के कारन अपने आप ही कारोबार पर रोक लग जाती है.जिस स्तर पर कारोबार रुकता है,उसे लोअर सर्किट कहा जाता है. लोअर सर्किट चालू बाजार में कभी भी लग सकता है.
लोअर सर्किट का इस्तेमाल कब होता है
लोअर सर्किट का इस्तमाल बाजार में हो रही अचानक भारी गिराबट को कंट्रोल करेने के लिए किया जाता है, स्टॉक बाजार में इंडेक्स आधारित सर्किट पूरे भारतीय बाजार पर लागू होता है,यह 10फीसदी,15फीसदी और 20फीसदी की गिरावट पर लगता है
अपर सर्किट क्या है
जब कभी अचानक एक ही दिन में बाजार किसी कारन से बहुत तेजी से बढ़ने लगता है और कोई भी शेयर या इंडेक्स कॉफी तेजी से बढ़ने लगता है, उस समय शेयर में आई बड़ी तेजी के कारन अपने आप ही कारोबार पर रोक लग जाती है, जिस स्तर पर कारोबार रुकता है,उसे अपर सर्किट कहा जाता है. अपर सर्किट चालू बाजार में कभी भी लग सकता है.
अपर सर्किट का इस्तेमाल
कब होता है
अपर सर्किट का इस्तमाल बाजार में हो रही अचानक भारी तेजी को कंट्रोल करेने के लिए किया जाता है, स्टॉक बाजार में इंडेक्स आधारित सर्किट पूरे भारतीय बाजार पर लागू होता है,यह भी लोअर सर्किट की तरह 10फीसदी,15फीसदी और 20फीसदी की तेजी पर लगता है
भारतीय शेयर बाजार में
कब से हुआ सर्किट का प्रावधान
भारतीय शेयर
बाजार में लोअर सर्किट और अपर सर्किट को
शेयर बाजार के एक सीमा से ज्यादा बढ़ने या गिरने पर ब्रेक लगाने के लिए उपयोग में लाया जाता है, सेबी ने भारतीय
शेयर बाजार में अपर सर्किट और लोअर सर्किट लगाने की शुरुआत देश में 28
जून 2001
से शुरू किया था, भारतीय शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर 17
मई 2004
को पहली बार
इस्तेमाल किया गया था.
कितनी देर के लिए रुकता
है कारोबार
करोबार रुकने के
कुछ नियम इस तरह है
·
10 फीसदी का सर्किट नियम
यदि 1 बजे से पहले 10 फीसदी की गिरावट आती है,तो बाजार के करोबार में लोअर सर्किट लगा के बाजार के करोबार
को 1 घंटे के लिए पूरी तरह रोक दिया जाता है. और इसी 1घंटे मे से 15
मिनट का प्री-ओपन
सेशन भी होता है.
और यदि 10 फीसदी का सर्किट दोपहर 1 बजे के बाद लगता है,तो बाजार के कारोबार
को 30 मिनट के लिए रोक दिया जाता
है.
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15 फीसदी का सर्किट नियम
यदि 1 बजे से पहले 15 फीसदी की गिरावट आती है,तो बाजार के करोबार में लोअर सर्किट लगा के बाजार के करोबार
को 1 घंटा और 45 मिनट के लिए पूरी तरह रोक दिया जाता है. फिर 15 मिनट का प्री-ओपन
सेशन होता है.
और यदि 15
फीसदी का सर्किट
दोपहर 1 बजे के बाद लगता है,तो बाजार के
कारोबार को 45 मिनट के लिए रोक दिया जाता है.और 15
मिनट का प्री-ओपन
सेशन होता है.
·
20 फीसदी का सर्किट नियम
यदि भारतीय शेयर
बाजार के प्रमुख सूचकांक पूरे दिन में किसी भी समय 20 फीसदी तक की गिरावट आती है, तो कारोबार को पूरे दिन के
लिए रोक दिया जाता है और फिर बाजार का
कारोबार अगले सत्र में ही शुरू होता है.
सर्किट का इस्तेमाल
क्यों किया जाता है
आमतौर पर सर्किट
का इस्तमाल बाजार के बड़े झटकों से ब्रोकर और निवेशको को होने वाले नुकसान से
बचाने के लिए किया जाता है, ऐसी स्थिति में
आने पर बाजार पर दबाव बढ़ जाता है. इसलिए सर्किट के स्तर स्टॉक एक्सचेंज द्वारा तय किए जाते हैं.
निष्कर्ष:
आज हमने इस लेख में जाना की शेयर बाजार में लोअर सर्किट और अपर सर्किट क्या होता है, और सर्किट
का इस्तेमाल क्यों किया जाता है,अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमे कमेंट कर सकते है|
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